जब डॉ ने जवाब दे दिया तो खुद रिसर्च कर बचाई अपने बच्चे की जान

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ला ग्रेंज.जॉर्जिया के ला ग्रेंज में एक मां ने अपने बेटे की अजीब बीमारी के बारे में बताया है। जिसका डॉक्टर्स भी पता नहीं लगा सके थे। डेनियल मैक्नेर नाम की महिला ने बताया कि उसने खुद किताबों और इंटरनेट पर रिसर्च करके बेटे की जान बचाई थी। महिला ने पीपुल्स मैगजीन को दिए इंटरव्यू में दुनिया के बाकी पैरेंट्स को भी अपने बच्चों को ऐसी छोटी, लेकिन जानलेवा बीमारी से अलर्ट रहने को कहा है। क्या है डेनियल और उसके बेटे की कहानी…

– डेनियल ने बताया कि वह अपने पांच साल के बेटे मेसोन को अपनी मां के घर ले गई थी। वहां घर में नहाते हुए उसके बेटे को टिक (छोटा कीड़ा) ने काट लिया। टिक के काटने के बाद मेसोन पर उसका तुरंत कोई असर नहीं हुआ।”

– उन्होंने बताया, ” जब मेरा बेटा सुबह उठा तो उसके नाभि पर टिक के काटने का लाल निशान बना था और वह हिस्सा थोड़ा इन्फेक्टेड भी दिखाई दिया। मैं उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने इसे इम्पिटिगो (बैक्टेरियल स्किन इन्फेक्शन) बताकर मुझे 10 दिन के एंटीबायोटिक्स देकर रवाना कर दिया।

– “लेकिन उससे फर्क नहीं पड़ा। बेटे मेसोन ने बुखार, डायरिया और पेट दर्द की शिकायत की। लेकिन मैं उस समय हैरान रह गई, जब उसके पूरे बदन पर रैशेज (लाल-लाल चकते) हो गए। मैं फिर उसे डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने बताया कि एंटीबायोटिक्स दवाओं का रिएक्शन लेट होता है। ठीक होने में करीब छह दिन और लगेंगे, लेकिन मुझे मामला कुछ और लग रहा था।”

आखिर मेसोन को हुआ क्या था?

– डेनियल ने बताया, “डॉक्टर की बात पर मुझे यकीन नहीं हुआ तो मैंने खुद मेसोन की बीमारी पर इंटरनेट और किताबों में रिसर्च करना शुरू कर दिया। मैंने एक एेसी कंडिशन को ढूंढ निकाला, जो मेरे बेटे की बीमारी से मेल खा रही थी। ”
– “इस कंडिशन का नाम ‘रॉकी माउंटेन स्पॉटेड फीवर’ था। इसे टिक बोर्न भी कहा जाता है। इसमें फीवर, सिरदर्द, जी मचलाना, उल्टी आना और पेट दर्द जैसे सिमटम्स होते हैं। ये रैशेज, बुखार के दो से चार दिन बाद डेवलप होते हैं। क्योंकि ये बुखार में नहीं उभरता है, इसलिए ‘रॉकी माउंटेन स्पॉटेड फीवर’ का पता लगाना मुश्किल होता है।”
– डेनियल ने बताया कि अगर इसे एंटीबायोटिक्स से ठीक नहीं किया गया तो इस कंडिशन में बाल झड़ने, पैरालिसिल, बॉडी के किसी के अंग का अलग हो जाना और एक्ट्रीम सिचुएशन में जान भी जा सकती है।
– उसने बताया कि घरों में छोटे बच्चों की ऐसी कंडिशन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे जान भी जा सकती है। उनकी ये कहानी बाकी पैरेंट्स के लिए सबक है।

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