क्या उत्तराखंड का बदलने वाला है राजनैतिक भूगोल

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DH tv न्यूज़ डेस्क के लिए विजय रावत

जैसे जैसे लोकसभा चुनाव निकट आते जा रहे हैं उत्तराखंड के राजनैतिक समीकरण बनने बिगड़ने लगे हैं। गौरतलब है कि 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों एक संक्रमण काल से गुजरे थे। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी से 10 विधायक टूटकर भाजपा में शामिल हो गए थे। इन सभी 10 लोगों को भाजपा द्वारा टिकट दिए जाने से भाजपा में एक अंदरूनी विद्रोह हो गया। कुछ ने तो पार्टी छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ा तो कुछ ने कांग्रेस में शामिल होकर चुनाव लड़ा। कुछ ने पार्टी में रहकर विद्रोही उम्मीदवारों का प्रचार किया। कमोबेश कांग्रेस पार्टी में भी ऐसा ही देखने को मिला। मैदानी क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या बढ़ने तथा नरेंद्र मोदी फैक्टर के चलते भले ही भाजपा चुनावी वैतरणी पार कर गई लेकिन भाजपा के विद्रोही उम्मीदवारों ने चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया। कांग्रेस की करारी हार के कारण तो ये बागी कांग्रेसी नेता ही बने। लगभग 18 महीनों के बाद भी भाजपा और कांग्रेस में असंतुष्टों की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से इजाफा हुआ है। अभी हाल ही में ऋषिकेश के एक होटल में कांग्रेस और भाजपा के असंतुष्टों की मीटिंग के बाद से ही प्रदेश की राजनीति गरमाने लगी है। मीटिंग में अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गजों के शामिल होने से कयास लगाए जा रहे हैं कि उत्तराखंड में तीसरी ताक़त का राजनैतिक धरातल तैयार हो रहा है। कुछ राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि उत्तराखंड की राजनीति भी पूर्वोत्तर एवं पूरब के कुछ राज्यों की तरह अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम करने में कामयाब हो सकती है। इन प्रेक्षकों का कहना है कि इस तरह के राजनैतिक धरातल को तैयार करने का यह उपयुक्त समय है। एक तरफ तो पूरे प्रदेश में राज्य आंदोलन में अपना अहम योगदान देने वाली मातृशक्ति आंदोलनकारियों के सपने धूल-धूसरित करने और पहाड़ को शराब के आगोश में डुबाने वाली भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज है वहीं इन दोनों पार्टियों में कार्यकर्ता भी विद्रोह के मूड में हैं। युवाओं के मन में भी आक्रोश है। इन सब वजहों के बावजूद इन सभी के पास कोई ऐसा विकल्प नहीं था जहां वह अपने आक्रोश का इज़हार कर सके। उत्तराखंड क्रांति दल और उसके नेता राजनीतिक रूप से आभाहीन और शक्तिहीन हो चुके हैं। जबकि नए राजनीतिक विकल्प की ज़मीन तैयार करने वालों में नए ऊर्जावान, जन समर्थन, शक्तिशाली राजनीतिक लोग हैं जिन्होंने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़कर जनता के अपनी पकड़ का अहसास पूरे प्रदेश को कराया। आसन्न स्थानीय निकाय चुनाव को देखते हुए पूरे प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में राजनैतिक कार्यकर्ताओं की निगाह देहरादून में होने वाली इस विकल्प की अगली मीटिंग पर टिकी है। बड़ी संख्या में लोग नगर निगम और नगर पालिकाओ में पार्षद, मेयर और चेयरमैन पद का चुनाव लड़ने को लालायित हैं। इस नए धरातल पर पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनै, पूर्व विधायक नरेंद्र नगर ओम गोपाल रावत, ऋषिकेश से संदीप गुप्ता ,रुड़की से पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन , सहसपुर से कांग्रेस के बागी दिगज्ज आर्येन्द्र शर्मा, रानीखेत से भाजपा कर बागी दिग्गज प्रमोद नैनवाल के अलावा राजकुमार जायसवाल सहित निर्दलीय चुनाव लड़ चुके कई युवा चेहरों के आने से एक बात तो साफ है कि इस नई राजनीतिक शक्ति को न केवल बहुत बड़ा जनसमर्थन मिलने वाला है बल्कि उत्तराखंड में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन आने वाला है।

DH tv न्यूज़ डेस्क के लिए विजय रावत

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