उत्तराखंड भाजपा में बड़े राजनितिक भूचाल आने की हलचल

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पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड में भाजपा संगठन और सरकार की ग्रह दशा ठीक नहीं चल रही है। सरकार हर मोर्चे पर विफल होती नजर आ रही है पहले एक शिक्षिका उत्तरापंत मामले में मुख्यमंत्री की पूरे देश में किरकिरी हुई उसके बाद हरिद्वार झोटा बिरयानी इफेक्ट ने तो भाजपा को अंदर से हिला कर रख दिया। वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान ने तो सरकार की चूलें हिला दी। अतिक्रमण हटाओ अभियान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य को कोई राहत नहीं दी।

अतिक्रमण हटाओ अभियान की जद में आए लोगों के पुनर्वासन पर सरकार विफल साबित हो रही है क्षेत्रीय विधायक भी जनता का रुख भांप कर अंदर से बेचैन हो रहे हैं । अफसरों पर मुख्यमंत्री व मंत्रियों की पकड़ ढीली हो चुकी है ऐसा लग रहा है मानो राज्य में लोकप्रिय सरकार ना होकर राष्ट्रपति शासन लगा हो । अतिक्रमण हटाओ अभियान में शामिल शासन और प्रशासन के अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन भी नहीं उठा रहे हैं । मौके की नजाकत भागते हुए पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा अपने कैंप में विधायकों एवं मंत्रियों को रात्रि भोज पर बुलाने से भाजपा की अंदरूनी सियासत और गरमा गई है । हाल ही में हुई भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भी असंतोष खुलकर सामने आया था यूं तो विजय बहुगुणा राज्य की सियासत से दूरी बनाकर रखते हैं और अपने को केवल अपने साथ कांग्रेस से टूट कर आए विधायकों तक ही सीमित रखते हैं लेकिन यह पूरी भाजपा को पता है कि विधानसभा चुनाव में विजय बहुगुणा ने जो कहा भाजपा आलाकमान ने वो किया । कुल मिलाकर 20 विधायक ऐसे हैं ,जिन्हें विजय बहुगुणा ने टिकट दिलाने से लेकर जिताने में परोक्ष रूप से मदद की है । ऐसे में जब मुख्यमंत्री के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं विजय बहुगुणा का अचानक सक्रिय होना यह संकेत दे रहा है कि उत्तराखंड में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आने वाला है।

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